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मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल की पहल, बीमार बच्चों के चेहरे पर मुस्कुराहट बिखेरेगा एप

बरेली। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर जीरो से 18 साल तक के बच्चों के 42 बीमारियों का मुफ्त इलाज होगा। बच्चों के सर्वे से लेकर उनकी बीमारी का इलाज और ऑपरेशन की मॉनिटरिंग के लिए ऑनलाइन एप तैयार किया गया है। मंडलायुक्त के निर्देश पर सीडीओ जग प्रवेश और एनआईसी ने मोबाइल एप्लीकेशन विकसित कर उसे लॉन्च करने की तैयारी शुरू कर दी है।

सीडीओ ने एनआईसी से मिलकर बनाया मोबाइल एप्लीकेशन, अगले सप्ताह होगा लॉन्च

एप्लीकेशन का उद्देश्य गरीब, आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के स्वास्थ्य का परीक्षण, रोगों को चिन्हित कर उसकी गहन मॉनिटरिंग कर बच्चों को स्वास्थ्य लाभ पहुंचाने का उद्देश्य रखा गया है। मंडलायुक्त की अध्यक्षता में आयुक्त सभागार में चारों जिलों के डीएम और सीडीओ, आरबीएस के नोडल अधिकारी के साथ विकसित किए गए एप का प्रस्तुतीकरण दिया गया। एप के माध्यम से चिन्हित बच्चों के रजिस्ट्रेशन से लेकर उनकी बीमारी का इलाज, ऑपरेशन और डिस्चार्ज तक फॉलो किया जाएगा। कमिश्नर डीएम और सीडीओ ऑनलाइन एप के जरिए इसकी मॉनिटरिंग कर सकेंगे। एप को अगले सप्ताह बरेली मंडल के चारों जिलों में लांच किया जाएगा।

बीमारियों का इलाज कर लौटेगी परिवारों में खुशहाली बच्चों की मुस्कान

मंडलायुक्त ने बताया कि सभी आंगनवाड़ी केंद्र स्कूलों में जाकर स्वास्थ्य टीमें स्क्रीनिंग करेंगी। उनके हालात को देखते हुए बच्चों का इलाज कराया जाएगा। इनमें डिफेक्ट एड बर्थ, डिफिशिएंसी, डिजीज, डेवलपमेंट डीलेज इंक्लूडिंग, डिसेबिलिटी किसी भी प्रकार की बीमारी का विकार, बीमारी, कमी और विकलांगता है। आरबीएसके में पहले 39 प्रकार की बीमारियां थी। तीन और बीमारियों को इसमें जोड़ दिया गया है। इनमें ट्यूबरक्लोसिस, लेप्रोसी और बौनापन का भी इलाज किया जाएगा। मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना की तरह ही आरबीएसके बधिर बच्चों को सुनने की क्षमता प्रदान करने के लिए एप योजना की भी शुरुआत की गई है। इस योजना के तहत बच्चों को नई जिंदगी दी जाएगी। बधिर बच्चों को सुनने के लिए यंत्र दिया था। लेकिन अब क्लियर इंप्लांट सर्जरी के माध्यम से सामान्य बच्चों की तरह उनमें सुनने की क्षमता विकसित की जाएगी।

जिले में 30 टीमें घूम घूम कर करती हैं स्क्रीनिंग

सीडीओ जग प्रवेश ने बताया कि बरेली में एक डॉक्टर, नर्स, वार्ड बॉय और एक अन्य टेक्निकल स्टाफ के साथ चार चार लोगों की टीम बनाई गई है। जिले में अलग-अलग 30 टीमें घूम घूम कर आंगनबाड़ी केंद्र, सरकारी स्कूलों में जाकर बच्चों की स्क्रीनिंग करती हैं। बच्चों का नाम, पता, मोबाइल नंबर, बीमारी का प्रकार समेत छह तरीके का डाटा फीड किया जा रहा है। मोबाइल एप्लीकेशन में डाटा फीड होने के बाद संबंधित बच्चों को इलाज के लिए भेजा जाता है। सीडीओ ने बताया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत बरेली के 15 ब्लॉकों में दो-दो टीमें लगाई गई हैं। टीमें गांव में जाकर सर्वे कर रही हैं और बच्चों का डाटा तैयार कर रही हैं।

पिछले साल 3.5 लाख बच्चों का किया गया था सर्वे

सीडीओ जग प्रवेश ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने पिछले साल 3.5 लाख बच्चों का सर्वे किया था। जिन्हें कुछ न कुछ छोटी बीमारी थी। ऐसे बच्चों का सर्वे करने के बाद उनका डाटा फीड किया गया था। अब एप माध्यम से सभी बच्चों का सर्वे करने के बाद डाटा ऑनलाइन होगा। इसमें यह पता लगेगा कितने बच्चों का इलाज हो चुका है। कितने बच्चों का इलाज होना रह गया है। बच्चे को किस तरीके की बीमारी है और उसका इलाज कैसे किया जाना है। इसकी सारी डिटेल ऑनलाइन होगी। स्वास्थ्य विभाग की गांव को जाने वाली टीमों को यूजर आईडी और पासवर्ड दिया गया है। वह गांव में जाकर बच्चों का डाटा फीड करेंगे। कमिश्नर डीएम और सीडीओ ऑनलाइन एप के माध्यम से इसकी मॉनिटरिंग करेंगे।

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Author: HBC Headlines

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